ऋषिकेश: त्याग, विज्ञान और मानवता के मार्गदर्शक: गुरु तेग बहादुर और डॉ. जगदीश चंद्र बसु

ऋषिकेश: सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज आवास विकास ऋषिकेश में दो महान व्यक्तित्वों — सिख धर्म के नौंवें गुरु श्री गुरु तेग बहादुर जी और भारत के महान वैज्ञानिक डॉ. जगदीश चंद्र बसु की जयंती/पुण्यतिथि/स्मृति दिवस पर एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत दोनों महान व्यक्तित्व के चित्र पर विद्यालय के प्रधानाचार्य उमाकांत पंत एवं उप प्रधानाचार्य नागेन्द्र पोखरियाल ने संयुक्त रूप से पुष्प अर्पित कर व दीप प्रज्ज्वलन के साथ की ।

कार्यक्रम में वरिष्ठ आचार्य वीरेन्द्र कंसवाल ने कहा कि डॉ. जगदीश चंद्र बसु ने साबित किया कि विज्ञान केवल प्रयोग नहीं बल्कि चिंतन और जिज्ञासा का परिणाम है। उन्होंने पौधों में जीवन से संबंधित अद्भुत खोजें कर भारत को विज्ञान जगत में विशिष्ट पहचान दिलाई।विद्यालय के प्रधानाचार्य उमाकांत पंत ने कहा कि गुरु तेग बहादुर जी का बलिदान केवल सिख समाज का नहीं, बल्कि मानवता और धर्म की स्वतंत्रता के लिए अनूठा उदाहरण है। उनके अदम्य साहस, करुणा और सर्वधर्म समभाव ने भारतीय इतिहास में अमिट स्थान बनाया है।
छात्रों द्वारा गुरु तेग बहादुर जी के त्याग पर भावपूर्ण कविताएँ और डॉ. बसु के वैज्ञानिक योगदान पर प्रस्तुतियां दी गईं। विद्यालय के मीडिया प्रभारी नरेन्द्र खुराना ने मीडिया से जानकारी साझा करते हुए बताया कि गुरु तेग बहादुर शहीदी दिवस पर विशेष बात यह है कि यह सिखों के नौवें गुरु की धर्म, मानवीय मूल्यों और धार्मिक स्वतंत्रता के लिए किए गए सर्वोच्च बलिदान को याद दिलाता है। 1675 में औरंगजेब के शासनकाल में, उन्होंने कश्मीरी पंडितों को जबरन धर्मांतरण से बचाने के लिए अपने प्राणों का बलिदान दे दिया। इसी बलिदान के कारण उन्हें “हिंद की चादर” कहा जाता है।



