ऋषिकेश: राज्य निर्माण सेनानी 10 जुलाई को सीएम आवास घेराव करेंगे, 10% क्षैतिज आरक्षण तथा चिन्हीकरण की प्रमुख मांग

ऋषिकेश : उत्तराखंड राज्य निर्माण सेनानियों (राज्य आंदोलनकारी) की एक अहम बैठक शनिवार को नगर निगम परिसर स्थित स्वर्गीय इंद्रमणि बडोनी हॉल में आयोजित की गई. बैठक में राज्य निर्माण सेनानियों ने 10 जुलाई को सीएम आवास घेराव का एकमत से पूर्ण समर्थन किया. वक्ताओं तमाम जिलों के राज्य निर्माण सेनानियों से अपील की है कि अधिक से अधिक संख्या में आकर रैली को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाए.
बैठक में ऋषिकेश विधानसभा के समस्त राज्य निर्माण सेनानियों से अपील की गई की रैली में समस्त राज्य निर्माण सेनानी शिरकत करेंगे, जिससे सरकार पर दबाव बनाया जा सके. बैठक में मुख्य रूप से 10% क्षैतिज आरक्षण तथा चिन्हीकरण पर जोर देते हुए समस्त 9 मांगों को मांग पत्र में अंकित किया जाएगा. वक्ताओं ने यह भी कहा कि जिन राज्य निर्माण सेनानियों को पेंशन मिल रही है. ब्यूरोक्रेट एवं जिला प्रशासन बार-बार प्रमाण पत्र मांग कर राज्य निर्माण सेनानियों का उत्पीड़न कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. उन्होंने सरकार से मांग की कि पूर्व में भी सभी के प्रमाण पत्र विधिवत रूप से जमा किए जा चुके हैं. जिसके आधार पर लोगों को पेंशन मिल रही है. बावजूद उसके जिला प्रशासन एवं ब्यूरोक्रेट राज्य निर्माण सेनानियों का सम्मान के बजाय अपमान किया जा रहा है. जिसकी हम घोर निंदा करते हैं.
मुख्यमंत्री आवास रैली को सफल बनाने के लिए श्यामपुर, रायवाला, हरिपुर, छिद्दरवाला एवं रानीपोखरी, डोईवाला के राज्य निर्माण सेनानियों से भी संपर्क किया जाएगा. राज्य निर्माण सेनानियों ने सरकार से आग्रह किया जिन शहादत वह कुर्बानियों से इस राज्य का निर्माण हुआ था. किसी भी सरकार ने इस पर गंभीरता पूर्वक विचार नहीं किया. अगर विचार किया होता तो 23 वर्षों बाद भी राज्य निर्माण सेनानियों को अपने हकों के लिए सड़कों पर नहीं उतरना पड़ता. हम राज्य सरकार से मांग करते हैं. राज्य निर्माण सेनानियों की मांगों पर अभिलंब विचार करते हुए उनकी समस्याओं का तुरंत निस्तारण किया जाए नहीं तो सरकार को आगामी लोकसभा चुनाव में घोर परिणाम भुगतने पड़ेंगे. जिसकी भरपाई कभी नहीं हो सकती. इसलिए समय रहते हुए राज्य आंदोलनकारियों की मांगों पर संज्ञान लिया जाए. बैठक में इस अवसर पर मुख्य रूप से वेद प्रकाश शर्मा, डीएस गुसाईं, गंभीर मेवाड़, बलवीर सिंह नेगी, विक्रम भंडारी, रकम पोखरियाल, गुलाब सिंह रावत, युद्धवीर सिंह चौहान, महादेव सिंह रामगढ़, बेताल सिंह धनाई, मायाराम उनियाल, दिगंबर भट्ट, कुसुम लता शर्मा, जयंती नेगी, शकुंतला नेगी, यशोदा नेगी, मुन्नी ध्यानी, शीला ध्यानी, आरती ध्यानी, पुष्पा रावत, रामेश्वरी रावत, पूर्णा राणा , कमला पोखरियाल, कमला रौतेला, रोशनी खरोरा, सत्तो रामगढ़, सुशीला राणा, कुंवारा नेगी, ज्ञानी नेगी, यशोदा चमोली, जयंती नेगी, विजय पंत, लज्जावती डंगवाल सहित सैकड़ों लोगों ने शिरकत की. बैठक की अध्यक्षता पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष वीरेंद्र शर्मा तथा संचालन वेद प्रकाश शर्मा ने किया.
मुख्यमंत्री धामी ने सबसे ज्यादा मांगों को माना और लागू किया राज्य आंदोलनकारियों की (राज्य निर्माण सेनानी) फिर भी धरना प्रदर्शन जारी-
सरकार इस मामले में पहले से प्रक्रिया में है. उसके बावजूद धरना प्रदर्शन जारी है राज्य आंदोलनकारियों का. हालंकि इनमें से भी कुछ धरना प्रदर्शन करने के पक्ष में हैं कुछ नहीं. क्योँकि जब सरकार पहले से प्रक्रिया में है तो क्या धरना प्रदर्शन करने से क्या लाभ मिल पायेगा ? यह कहना है नाम न छपने की शर्त पर कुछ राज्य आंदोलनकारियों का. बात भी एक हद तक सही है. राज्य आंदोलनकारियों को राज्य गठन के बाद सरकारी सेवाओं में 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण देने का निर्णय लिया गया. वर्ष 2004 में तत्कालीन एनडी तिवारी सरकार के समय किए गए शासनादेश के आधार पर बड़ी संख्या में चिह्नित आंदोलनकारियों की विभिन्न सरकारी विभागों में नौकरी भी लगी. इस बीच वर्ष 2011 में आंदोलनकारियों को क्षैतिज आरक्षण दिए जाने के विषय को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई, जिस पर हाईकोर्ट ने आंदोलनकारियों को दिए जा रहे आरक्षण की व्यवस्था को समाप्त करने का निर्णय दिया था.
उल्लेखनीय है, सम्बन्धित विधेयक वर्ष 2022 तक राजभवन में रहा लंबित. आंदोलनकारियों द्वारा लगातार मांग करने के बाद वर्ष 2015 में हरीश रावत सरकार ने आंदोलनकारियों को आरक्षण दिए जाने संबंधित विधेयक को विधानसभा से पारित करा कर राजभवन भेजा. यह विधेयक वर्ष 2022 तक राजभवन में लंबित रहा. इसके बाद राजभवन ने इस विधेयक में कुछ कमियों को इंगित करते हुए वापस लौटा दिया. प्रदेश सरकार ने इसमें इंगित खामियों को दूर करने के लिए कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल की अध्यक्षता में मंत्रिमंडलीय उप समिति बनाई. इस समिति की अनुशंसा पर कैबिनेट ने इसे फिर से राजभवन भेजने को मंजूरी प्रदान की।अब कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद कार्मिक ने संबंधित प्रस्ताव न्याय विभाग को भेजा। अब न्याय विभाग ने इसमें अपना अभिमत दे दिया है. अब कार्मिक विभाग ने विधेयक फिर से राजभवन भेजने संबंधी पत्रावली को मुख्यमंत्री कार्यालय भेजा है। सचिव कार्मिक शैलेश बगोली ने कहा कि न्याय विभाग का परामर्श मिल चुका है. अब इसमें उच्च स्तर पर चर्चा की जाएगी. अनुमति मिलने के बाद इसे राजभवन भेज दिया जाएगा.



