ऋषिकेश :28 मार्च को श्री नारायण दास जी महाराज का होगा अभिषेक, श्री भरत मिलाप आश्रम के नूतन उत्तराधिकारी महन्त पद पर

- श्री भरत मिलाप आश्रम ऋषिकेश में संतों की हुई बैठक, विरक्त वैष्णव मंडल समिति के पदाधिकारी, प्रतिनिधि रहे मौजूद
- शनिवार को ‘विरक्त वैष्णव मण्डल समिति’ की बैठक में तय हुआ,महंताई कार्यक्रम के बारे में
- 28 मार्च, 2026 को भागवताचार्य नारायण दास जी महाराज का ‘उत्तराधिकारी महन्त’ के पवित्र पद पर विधि-विधान पूर्वक अभिषेक एवं पद प्रतिष्ठा समारोह आयोजित किया जाएगा
ऋषिकेश : तीर्थनगरी ऋषिकेश के पावन मायाकुण्ड क्षेत्र में स्थित श्री भरत मिलाप आश्रम के प्रांगण में शनिवार को ‘विरक्त वैष्णव मण्डल समिति’ की एक गरिमामयी एवं महत्त्वपूर्ण संगोष्ठी हुई. संगोष्ठी सायंकाल 4;00 बजे बुलाई गयी थी. बैठक ब्रह्मपुरी के जगद्गुरु योगानन्दाचार्य स्वामी दयाराम देवाचार्य जी महाराज की अध्यक्षता में अत्यंत सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुई।प्रमुख निर्णय एवं आध्यात्मिक विमर्श बैठक के मध्य वर्तमान महन्त श्यामाचरण दास जी महाराज ने समिति के समक्ष एक औपचारिक निवेदन प्रस्तुत किया। उन्होंने अपनी अवस्था और आश्रम के सुचारू संचालन को दृष्टिगत रखते हुए, अपने परम योग्य एवं शास्त्र-मर्मज्ञ शिष्य भागवताचार्य नारायण दास जी को आश्रम के ‘उत्तराधिकारी महन्त’ के रूप में प्रतिष्ठित करने की मंगल कामना व्यक्त की।

समिति के सचिव महामण्डलेश्वर महन्त ईश्वर दास जी महाराज एवं उपस्थित सिद्ध संतों ने इस प्रस्ताव पर गंभीर चिंतन-मनन किया। गहन शास्त्रार्थ और विमर्श के पश्चात सर्वसम्मति से यह अनुसमर्थन किया गया कि भरत मिलाप आश्रम की समस्त स्थावर-जंगम संपत्तियों का विधिवत प्रबंधन महन्त श्यामाचरण दास जी के मार्गदर्शन में सुनिश्चित रहे. उत्तराधिकार की प्रक्रिया को शास्त्रोक्त विधि से पूर्ण किया जाएगा. पूज्य-संतों और महन्तवृन्द की समिति ने हर्षोल्लास के साथ यह घोषणा की है कि आगामी 28 मार्च, 2026 को भागवताचार्य नारायण दास जी महाराज का ‘उत्तराधिकारी महन्त’ के पवित्र पद पर विधि-विधान पूर्वक अभिषेक एवं पद प्रतिष्ठा समारोह आयोजित किया जाएगा।इस आध्यात्मिक संगोष्ठी में महामण्डलेश्वर देवाचार्य दयाराम दास जी, परमपूज्य महामण्डलेश्वर ईश्वरदास जी महाराज, महन्त छोटन दास जी महाराज, प्रह्लाद दास जी, सखी बाबा, महन्त शिवराम दास जी, श्री महन्त रामशरण दास जी, गोपालाचार्य महाराज, महामण्डलेश्वर वृन्दावन दास जी, भागवताचार्य नारायण दास जी, महन्त रवि शास्त्री, महन्त चक्रपाणि दास, एवं महन्त करुणाशंकर सहित मण्डल के अनेक मूर्धन्य संत, मनीषी एवं पदाधिकारी उपस्थित रहे।



