आकाशवाणी से “वंदे मातरम्” पूरे गीत का नियमित प्रसारण शुरू

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                 -पार्थसारथि थपलियाल-
नई दिल्ली: भारतीय स्वाधीनता आंदोलन के दौर में बंकिम चन्द्र चटर्जी द्वारा रचित “वंदे मातरम्” गीत ने आम भारतीयों में जनजागरण का काम किया था।  बंकिम चंद्र चटर्जी ने यह गीत 7 नवंबर 1875 को लिखा था जो बाद में 1882 में उन्हीं के उपन्यास आनंदमठ में प्रकाशित हुआ था। इस गीत की धुन रबीन्द्रनाथ टैगोर ने तैयार की थी। वंदे मातरम्’ गीत का एक विशेष पहलू यह है कि यह संस्कृत और बांग्ला, दोनों भाषाओं में लिखा गया है। पहले दो पद मुख्यतः संस्कृत में हैं, जबकि शेष भाग बंगला और संस्कृत  भाषा में हैं। 1896 में कांग्रेस के कोलकाता अधिवेशन में रबींद्रनाथ टैगोर ने गाया। स्वाधीनता आंदोलन के दौरान 1942 में क्रांतिकारियों द्वारा बॉम्बे में स्थापित रेडियो से, वंदे मातरम् प्रसारण का हिस्सा था। 24 जनवरी 1950 को इस गीत को संविधान सभा ने राष्ट्रगीत के रूप में स्वीकार किया था।    सन् 1950 से आकाशवाणी की प्रातः कालीन सभा का आरम्भ राष्ट्रगीत वंदे मातरम् से आरम्भ किए जाने की परंपरा है। अभी तक इस गीत के आरंभिक दो पदों का ही प्रसारण आकाशवाणी से होता रहा है, जिसकी अवधि 65 सेकेंड है।
“वंदे मातरम्” गीत रचना के 150वें वर्ष में सभी सरकारी आयोजनों में यह गीत संपूर्ण पदों के साथ गाया जा रहा है। इस संबंध में गृहमंत्रालय, भारत सरकार ने 28 जनवरी 2026 को दिशानिर्देश जारी किए हैं।आकाशवाणी ने वंदे मातरम गीत के दो संस्करण दिसंबर 2025 में तैयार कर लिए थे। इन दोनों संस्करणों का लोकार्पण 1 जनवरी 2026 को आकाशवाणी दिल्ली के भारत रत्न पंडित रविशंकर स्टुडियो में प्रसार भारती के मुख्य कार्यकारी अधिकारी गौरव द्विवेदी और आकाशवाणी महानिदेशक राजीव जैन द्वारा  किया जा चुका है। इनकी संगीत रचना संगीतकार जौहर अली ने तैयार की है। इसी वर्ष 13 फरवरी को विश्व रेडियो दिवस के अवसर पर रायपुर में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने वंदे मातरम् के 5 संस्करणों का लोकार्पण किया। अब तक राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के 7 संस्करण लोकार्पित हो चुके हैं।      26 मार्च 2026 से आकाशवाणी के सभी केंद्रों से, यथा स्थिति, प्रातः कालीन सभा के आरम्भ में राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के सभी 6 पदों के साथ प्रसारित होने के आदेश सभी आकाशवाणी केंद्रों को भेज दिए गए हैं। यह एक महत्वपूर्ण अवसर है। राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के इस नए संस्करण को गाया है- कल्याण (महाराष्ट्र) के हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत के विख्यात गायक कलाकार पंडित चन्द्रशेखर वजे ने। उन्होंने इस गीत को राग देस में गाया है। पूर्व में प्रसारित हो रही रिकॉर्डिंग राग भैरवी में थी। नए रिकॉर्डेड गीत की अवधि 3 मिनट 10 सेकंड है। पंडित चंद्रशेखर वे ने यह रिकॉर्डिंग बिना मानदेय लिए, अपनी ओर से आकाशवाणी को यथा वांछित प्रसारण के लिए, लिखित में भेंट की है।आकाशवाणी दिल्ली की कार्यक्रम प्रमुख मनीषा जैन ने बताया कि आकाशवाणी महानिदेशक राजीव जैन के मार्गदर्शन में दिल्ली केंद्र को क्षेत्रीय वाद्य यंत्रों के साथ अन्य संस्करण निर्माण करने की अनुमति मिली है। कुल 25 संस्करण तैयार किये जाने हैं। इस योजना पर काम शुरू हो चुका है।
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