हरिद्वार : अखाड़ा परिषद् में दो फाड़ ! रविन्द्र पूरी बोले अध्यक्ष बनने की एक तय प्रक्रिया
- एक जैसा नाम होने से असमंसज की स्थिति बनी है, दोनों के नाम रविन्द्र पुरी है
- स्वामी रविन्द्र पुरी के आठ अखाड़ों के समर्थन के दावे के बाद अब दूसरी अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष रवींद्र पुरी ने भी इसपर सवाल उठाए हैं
हरिद्वार में आगामी अर्धकुंभ को ‘कुंभ’ बनाने से शुरू हुए विवाद बढ़ते जा रहे हैं।इसको लेकर संतों में शुरू हुए विवादों ने अखाड़ा परिषद को ही दो भागों में बांट दिया है। स्वामी रविन्द्र पुरी के आठ अखाड़ों के समर्थन के दावे के बाद अब दूसरी अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष रवींद्र पुरी ने भी इसपर सवाल उठाए हैं।13 अखाड़े दो गुट में बंटे नजर आ रहे हैं। एक धड़ा निरंजनी अखाड़े के रविंद्र पुरी को अध्यक्ष मानता है, जबकि दूसरा महानिर्वाणी अखाड़े के सचिव रविंद्र पुरी को अध्यक्ष बता रहा है। एक जैसा नाम होने से असमंसज की स्थिति बनी है।
श्रीमहंत रविंद्र पुरी के मुताबिक, अखाड़ा परिषद का अध्यक्ष बनने की एक तय प्रक्रिया होती है और कोई भी अखाड़ा या संत खुद को अध्यक्ष घोषित नहीं कर सकता है। उन्होंने कहा कि जिन अखाड़ों के नाम महानिर्वाणी अखाड़े ने अपने समर्थन में गिनाए हैं, वे वास्तव में उनकी अखाड़ा परिषद के साथ हैं। उन्होंने कहा कि कई संत अध्यक्ष बनने की इच्छा रखते हैं। लेकिन यह निर्धारित प्रक्रिया के बाद ही संभव है।अखाड़ों की इस रार से अगले साल हरिद्वार में हो रहे अर्धकुंभ जिसे सरकार कुंभ के रूप में आयोजित कर रही है और जिसके लिए 1527 करोड़ का महाबजट भी जारी कर दिया गया है, उसके आयोजन पर अनिश्चितता के बादल मंडराने लगे हैं।



