रायवाला :प्रतीत नगर में बंदरों का कहर, एक महिला समेत कई ग्रामीण घायल

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रायवाला :मानव-वन्य जीव संघर्ष लगातार जारी है. सरकारों के नियम कानून, विचार गोष्ठी, चिंतन शिविर, वर्कशॉप, जनजागरूकता जैसे शब्द मानव-वन्य जीव संघर्ष के लिए कई बार सुनने, देखने को मिले लेकिन ढाक के वही तीन पात. हुआ कुछ नहीं. संघर्ष जारी है. इंसान अब करे तो क्या करे ?

रायवाला इलाके के प्रतीत नगर में बंदरों का आजकल आतंक देखने को मिल रहा है. एक तरफ ग्रामीण बंदरो की बदमाशी से परेशान है वहीँ दूसरी तरफ लोगों को अपनी जान का भी ख़तरा बना हुआ है. क्योँकि बंदरों के काटने से लोग ग्रामीण खौफ में हैं. मामला रायवाला इलाके के प्रतीत नगर का है. लोगों का कहना है कि उनका घर से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है । बच्चे हो या बुजुर्ग बन्दर किसी पर भी झपटने लगते हैं. ऐसे में बच्चों का स्कूल जाना भी दुभर हो गया है। पिछले दिनों में कई बच्चों और महिलाओं को घायल कर चुके है बंदर।
बीते शनिवार को ग्रामीण सुमित्रा कंडवाल को बंदर के झुंड ने घायल कर दिया। 3 बंदरों ने मिलकर उनको काटा है। ऐसे में आप अंदाजा लगा सकते हैं क्या हालत हुई होगी उनकी. उनका कहना है वो अपने घर से बाहर निकली तभी बंदर उन पर झपट पड़े जब तक वो कुछ समझ पाती तब तक 3 बंदर उनके सर कंधे पर बैठ गए और उनके हाथों में कंधे में अपने दांत गाड़ दिए। सुमित्रा 62 वर्ष की है उनके बच्चे घर से बाहर रहते है । ऐसे में अब काफी दिखते उनको आ रही है।वहीँ, अन्य ग्रामीणों ने बंदरो से परेशान होकर मोतीचूर रेंज के मुलाजिमों से गुहार लगा कर वन विभाग से बंदरो को पकड़ने के लिए पिंजरा लगवाने की मांग तो वन बिभाग पिंजरा ले कर आ गया और लगा भी दिया.लेकिन बन्दर नहीं घुसे पिंजरे में.

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गाँव में लगातार आमद जारी है बंदरों की. ईको विकास समिति प्रतीतनगर के अध्यक्ष मुकेश भट्ट का कहना है कि बंदरों को जंगलों में पर्याप्त भोजन नही मिल पाता जिस वजह से बंदर आबादी वाली जगह का रुख करते है। वहीँ, खांड गांव के प्रधान शंकर दयाल का कहना है कि उनके ग्राम क्षेत्र सैनिक कालोनी में भी बदरों ने आतंक मचाया हुआ है। कई बार वे विभाग को चिट्ठी लिखी लेकिन कोई कार्यवाही होती नही दिखी थक हार कर उन्होंने अपने खर्चे पर बंदर पकड़ने की टीम के द्वारा पिंजरा लगाया और सैनिक कॉलोनी से 14 बंदर पकड़ कर ले गए है।जिनको चिड़ियापुर के जंगलों में छोड़ा जाएगा। ऐसे में ग्रामीण खौफ में तो हैं ही साथ ही वे क्या करें यह चिंतन का विषय है.

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