नैनीताल सांसद अजय भट्ट ने पूछा सदन में सवाल देश में न्यायालय में सूचना और संचार प्रौद्योगिकी को शामिल किए जाने की स्थिति क्या है ?

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  • न्यायालय में ई फाइलिंग शुरू कर दी गई है या नहीं और उत्तराखंड उच्च न्यायालय सहित न्यायालय और ब्यौरा सहित ई फाइलिंग माध्यम से कितने मामले दर्ज किए गए हैं ? -अजय भट्ट, सांसद, नैनीताल 
नई दिल्ली/नैनीताल :  पूर्व केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री व नैनीताल उधम सिंह नगर संसदीय क्षेत्र से सांसद  अजय भट्ट ने लोकसभा सत्र के दौरान तारांकिक प्रश्न पूछते हुए विधि एवं न्याय राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार अर्जुन राम मेघवाल से पूछा है कि देश में न्यायालय में सूचना और संचार प्रौद्योगिकी को शामिल किए जाने की स्थिति क्या है ?  इसके अलावा न्यायालय में ई फाइलिंग शुरू कर दी गई है या नहीं और उत्तराखंड उच्च न्यायालय सहित न्यायालय और ब्यौरा सहित ई फाइलिंग माध्यम से कितने मामले दर्ज किए गए हैं ? इसके अलावा ई फाइलिंग भीम की जागरूकता के लिए क्या कदम उठाए गए हैं??
सांसद  अजय भट्ट के तारांकिक प्रश्न का जवाब देते हुए विधि एवं न्याय राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार अर्जुन राम मेघवाल ने बताया कि  ई-न्यायालय मिशन मोड परियोजना को न्यायिक प्रणाली में सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) के उपयोग को मजबूत करने के उद्देश्य से देश भर में चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है। इस परियोजना ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग, वर्चुअल न्यायालय, ई-फाइलिंग, ई-भुगतान, न्यायालय अभिलेखों का डिजिटलीकरण, उन्नत केस प्रबंधन प्रणाली और राष्ट्रीय न्यायिक डेटा ग्रिड (एनजेडीजी) के माध्यम से निगरानी जैसे विभिन्न उपाय आरंभ किए हैं। 31.01.2026 तक ई-न्यायालय परियोजना के अधीन कुछ प्रमुख पहलें निम्नानुसार हैं :
(i) तेजी से पुनर्प्राप्ति, सुरक्षित भंडारण और निर्बाध डिजिटल कार्यप्रवाह सुनिश्चित करने के लिए विरासत अभिलेखों सहित न्यायालय के अभिलेखों के 660.36 करोड़ से अधिक पृष्ठों को न्यायालयों में डिजिटाइज किया गया है।
(ii) ट्रैफिक चालानों के ऑनलाइन न्यायनिर्णयन को सक्षम करने के लिए 30 वर्चुअल न्यायालय स्थापित किए गए हैं। वर्चुअल न्यायालयों को 10.13 करोड चालान प्राप्त हुए हैं और 1002.73 करोड़ रुपये के चालान का भुगतान किया गया है।
(iii) सभी उच्च न्यायालयों और जिला न्यायालयों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग नियम लागू किए गए हैं।
(iv) 3,240 न्यायालय परिसरों और 1,272 जेलों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (वीसी) सुविधाओं का विस्तार किया गया है। न्यायालयों ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से 3.97 करोड़ से अधिक सुनवाईयां की हैं, जिससे विचाराधीन कैदियों, गवाहों और वकीलों की दूरस्थ सुनवाई में सुविधा हुई है ।
(v) 11 उच्च न्यायालयों में न्यायालय कार्यवाहियों की लाइव स्ट्रीमिंग चालू है।
(vi) मामलों की ऑनलाइन फाइलिंग और न्यायालय फीस तथा जुर्माने के डिजिटल भुगतान की अनुमति देने के लिए ई-फाइलिंग और ई-भुगतान प्रणालियों को लागू किया गया है। ई-फाइलिंग प्लेटफॉर्म के माध्यम से लगभग 1.07 करोड़ मामले दर्ज किए गए हैं और ई-भुगतान प्रणाली ने 1,404 करोड़ रुपये की न्यायालय-फीस और 75 करोड़ रुपये के जुर्माने का लेनदेन किया है।
(vii) एनजेडीजी देश भर के न्यायालयों के मामले डेटा, आँकड़ों तक सार्वजनिक पहुंच प्रदान करता है और मामलों की पहचान करने, प्रबंधन करने और लंबन को कम करने के लिए एक निगरानी उपकरण के रूप में काम करने वाले एक बेहतर डैशबोर्ड के साथ उसे अद्यतन किया गया है ।
सीआईएस 4.0 को सभी न्यायालयों में लागू किया गया है, जिसमें बढ़ी हुई उपयोगिता, गोपनीयता सुरक्षा उपाय और एनजेडीजी, ई-फाइलिंग, वर्चुअल न्यायालय और आईसीजेएस जैसे राष्ट्रीय प्लेटफार्मों के साथ एकीकरण शामिल है ।
(ix) एस3 डब्ल्यूएएएस प्लेटफॉर्म 730 जिला न्यायालय वेबसाइटों को होस्ट करता है, जो सुरक्षित और सुलभ वेब अवसंरचना को सुनिश्चित करता है।
(x) रियल-टाइम डिजिटल सेवाओं का काफी विस्तार हुआ है, एसएमएस पुश एंड पुल (प्रतिदिन 4 लाख से अधिक एसएमएस भेजे गए), ईमेल (प्रतिदिन 6 लाख से अधिक भेजे गए) और बहुभाषी ई-न्यायालय सेवा पोर्टल (प्रतिदिन 35 लाख हिट) के माध्यम से मामलों की अद्यतन जानकारियां वकीलों और वादकारियों को भेजी जा रही हैं।
(xi) ई-न्यायालय सर्विसेज मोबाइल ऐप (3.59 करोड़ डाउनलोड) वकीलों और वादकारियों को मामले की स्थिति, कारण सूची आदि के बारे में प्रासंगिक जानकारी प्रदान करता है।
(xii) जस्टआईएस ऐप (22,133 डाउनलोड) न्यायाधीशों के लिए एक प्रबंधन उपकरण है जो उन्हें अपने न्यायिक कार्य को प्रभावी ढंग से व्यवस्थित करने और निगरानी करने में सहायता करता है ।
(xiii) सभी उच्च न्यायालयों में 48 ई-सेवा केंद्र और जिला न्यायालयों में 2,396 ई-सेवा केंद्र कार्यरत हैं ।
(xiv) मोबाइल आधारित और जीपीएस सक्षम वितरण तंत्र का उपयोग करके समन और नोटिस की इलेक्ट्रॉनिक सेवा और ट्रैकिंग के लिए नेशनल सर्विस एंड ट्रैकिंग ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स प्रोसेस (एनएसटीईपी) प्रणाली लागू की गई है। एनएसटीपीई के अधीन, न्यायालयों ने 7.29 करोड़ ई-आदेशिकाओं को प्रक्रियागत किया है ।
(xv) डिजिटल न्यायालय 2.1 कृत्रिम बुद्धिमता (एआई) का उपयोग करके अनुवाद और प्रतिलेखन की सुविधा के साथ पेपरलेस न्यायालयों के लिए एक अनुकूलित अनुप्रयोग है। यह न्यायाधीशों को सभी मामले से संबंधित दस्तावेजों, अभिवचनों और साक्ष्यों को डिजिटल रूप से अभिगमन करने में सक्षम बनाता है, जो एक पेपरलेस न्यायालय इकोसिस्टम की दिशा में एक महत्वपूर्ण छलांग है।
(ख) से (घ): ई-फाइलिंग प्रणाली विधिक दस्तावेजों की इलेक्ट्रॉनिक फाइलिंग के लिए विकसित
एक समग्र समाधान है। यह वादकारियों और वकीलों को कहीं से भी और किसी भी समय मामले से संबंधित दस्तावेजों तक पहुंचने और अपलोड करने में सक्षम बनाता है, जिससे ऐसे दस्तावेजों को फाइल करने के लिए शारीरिक रूप से न्यायालयों में जाने की आवश्यकता कम हो जाती है। देश के सभी न्यायालयों में मामलों की इलेक्ट्रॉनिक फाइलिंग की प्रक्रिया को मानकीकृत करने के लिए भारत के उच्चतम न्यायालय की ई-समिति द्वारा ई-फाइलिंग के लिए मॉडल नियम तैयार किए गए थे। ई-फाइलिंग उत्तराखंड उच्च न्यायालय और उसके सभी जिला न्यायालयों सहित 25 उच्च न्यायालयों और संबंधित जिला न्यायालयों में चालू है । 31.01.2026 तक ई-फाइल किए गए मामलों की उच्च न्यायालय-वार संख्या उपाबंध में है।
ई-न्यायालय परियोजना के अधीन, प्रशिक्षण कार्यक्रमों और न्यायालय कर्मचारियों और अधिवक्ताओं के लिए क्षमता निर्माण कार्यशालाओं, ई-न्यायालय सेवा पोर्टल और ई-फाइलिंग पोर्टल पर उपयोगकर्ता मैनुअल, न्यायालय परिसरों में स्थापित ई-सेवा केंद्र और देश भर में आउटरीच पहलों के माध्यम से ई-फाइलिंग प्रक्रिया के बारे में जागरूकता पैदा की जा रही है।इसके अलावा 13 मार्च 2026 तक उत्तराखंड उच्च न्यायालय में 341 ई फाइलिंग के मामले  और 101854 जिला न्यायालय के मामले सहित कुल 102195 मामले की ई फाइलिंग में दर्ज है।
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