ऋषिकेश : स्वामी समर्पण आश्रम, तपोवन में अंतरराष्ट्रीय योग एवं कुंडलिनी क्रिया योग महोत्सव, देश विदेश से पहुंचे सैकड़ों भक्त और साधक

नवरात्र के समय विशेष तौर पर श्रधालु, साधक, भक्त पहुँचते हैं आश्रम. इस दौरान आशीर्वाद के साथ साथ वे वहां पर हवन, पूजा में भी करते हैं प्रतिभाग

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  • नवरात्र में स्वामी समर्पण आश्रम  एक वैश्विक आध्यात्मिक संगम का केंद्र बना 
  • विभिन्न संस्कृतियों के साधक योग के माध्यम से एकता का अनुभव कर रहे हैं श्रधालु
  • स्पेन, अर्जेंटीना, जर्मनी, ऑस्ट्रिया, अमेरिका, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया, यूक्रेन, रूस आदि से भी पहुंचे आश्रम 
  • साधकों और श्रधालुओं  का आश्रम में लगातार आगमन जारी है 
  • अन्तराष्ट्रीय  अवधूत गुरु श्री स्वामी समर्पणानंद सरस्वती जी महाराज कुछ समय पहले UN (संयुक्त राष्ट्र संघ #AMERICA  में भी गए थे विश्व शांति के विषय पर ब्याख्यान देने 
  • ऑस्ट्रेलिया #AUSTRALIA में आयोजित हुए  “विश्व हिंदू आर्थिक मंच”(डब्ल्यूएचईएफ) 2025 में भी भाग लिया स्वामी समर्पणानंद सरस्वती महाराज ने
  • विश्वशांति के लिए हर वर्ष  पंचांगनी साधना होती है आश्रम में जो जनवरी से मई तक चलती है 
  • देश भर से प्रतिष्ठित ब्यापारी, राजनेता और अन्य हस्तियाँ पहुँच रही है आश्रम 
विदेशी साधक, श्रधालुओं की सनातन धर्म में आस्था, पूजा करने करते हुए

ऋषिकेश :(मनोज रौतेला) तपोवन स्थित स्वामी समर्पण आश्रम में आजकल देश विदेश से सैकड़ों श्रधालु पहुँच रहे हैं.  यहाँ पर योग और साधना का अद्भुत  मिलन देखने को मिल रहा है…तरफ GMVN स्थित गंगा रिसोर्ट में  दिनांक 18 से 22 मार्च 2026 तक उत्तराखंड सरकार के पर्यटन विभाग द्वारा अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। इसी अवधि में स्वामी समर्पण आश्रम, तपोवन में समर्पण स्कूल ऑफ योगा एंड तंत्र के तत्वावधान में अंतरराष्ट्रीय योग एवं कुंडलिनी क्रिया योग महोत्सव का दिव्य आयोजन भी  हो रहा है। नवरात्र के समय विशेष तौर पर श्रधालु, साधक, भक्त पहुँचते हैं आश्रम. इस दौरान आशीर्वाद के साथ साथ वे वहां पर हवन, पूजा में भी करते हैं प्रतिभाग. जिसका फल उन्हें उनके सफल  जीवन के रूप में मिलता है. कोई भी साधक, भक्त आश्रम पहुँच सकता है, लेकिन अनुशासन और साफ़ सफाई के साथ. विधि विधान से होते हैं  पूजा, दिव्या दर्शन. 

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ऑस्ट्रेलिया दौरे के दौरान स्वामी जी
इस पावन महोत्सव में विश्व के विभिन्न देशों जैसे स्पेन, अर्जेंटीना, जर्मनी, ऑस्ट्रिया, अमेरिका, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया, यूक्रेन, रूस आदि से साधक एवं श्रद्धालु बड़ी संख्या में सहभागिता कर रहे हैं। इस प्रकार आश्रम एक वैश्विक आध्यात्मिक संगम का केंद्र बन गया है, जहाँ विभिन्न संस्कृतियों के साधक योग के माध्यम से एकता का अनुभव कर रहे हैं। इस महोत्सव का दिव्य मार्गदर्शन अन्तराष्ट्रीय  अवधूत गुरु श्री स्वामी समर्पणानंद सरस्वती जी महाराज द्वारा किया जा रहा है.  जो प्राचीन भारतीय योग परंपरा के अनुसार साधना का संचालन कर रहे हैं.  उनके सान्निध्य में साधक केवल योग की विधियाँ ही नहीं, बल्कि उसके गूढ़ आध्यात्मिक आयामों का भी अनुभव कर रहे हैं.इस दौरान गुरु जी मौन धारण किये हुए रहते हैं. इसलिए विशेष रूप से, योगिनी अनामिका, जो गुरुजी की अत्यंत निकट शिष्या हैं, इस महोत्सव में सक्रिय रूप से सहयोग करते हुए विभिन्न कार्यक्रमों का संचालन एवं नेतृत्व कर रही हैं. उनके समर्पण और साधना से पूरे आयोजन में विशेष ऊर्जा और अनुशासन का संचार हो रहा है.  स्वामी अन्तराष्ट्रीय  अवधूत गुरु श्री स्वामी समर्पणानंद सरस्वती जी महाराज के अनुसार, “भारत सदैव विश्व गुरु रहा है और योग की इस दिव्य परंपरा के माध्यम से पुनः विश्व को दिशा देने में समर्थ है.  योग केवल शारीरिक व्यायाम या आसनों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवन जीने की एक सम्पूर्ण कला है. यह संसार (संसारिक जीवन) और आध्यात्मिकता के बीच संतुलन स्थापित करता है. योग हमें अपने आंतरिक स्वरूप, अपनी क्षमता और अपने भीतर स्थित दिव्य प्रेम को जानने का मार्ग प्रदान करता है.  यह आत्मबोध, शांति और सार्वभौमिक एकता की ओर ले जाने वाला विज्ञान है. उन्हूने कहा,  आज के युग में योग केवल परंपरा नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य की आवश्यकता है. आइए, योग को अपनाएं—एक सुंदर, सार्वभौमिक विज्ञान के रूप में, जो विश्व शांति, प्रेम और समरसता का मार्ग प्रशस्त करता है।”
योग साधकों को योग करवाते हुए स्वामी जी
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