हल्द्वानी : एक दिवसीय आर्कियोलॉजी एक्सप्लोरेशन- टूल्स एंड मेथड विषय पर इंडोलॉजी विशेषज्ञ डॉक्टर नीता दुबे द्वारा व्याख्यान दिया गया

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हल्द्वानी : शनिवार यानी  दिनांक 14 मार्च 2026 को एमबी राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय हल्द्वानी के इतिहास विभाग द्वारा एक दिवसीय आर्कियोलॉजी एक्सप्लोरेशन- टूल्स एंड मेथड विषय पर इंडोलॉजी विशेषज्ञ डॉक्टर नीता दुबे द्वारा व्याख्यान दिया गया। कार्यक्रम का संचालन डॉक्टर ज्योति टम्टा के द्वारा किया गया ।डॉक्टर ज्योति टम्टा ने विषय पर प्रकाश डालते हुए बताया कि पुरातत्व इतिहास न केवल हमें अतीत से जोड़ता है बल्कि अपनी संस्कृति व विरासत को समझने और संरक्षित करने के लिए भी प्रेरित करता है। यह हमें बताता है कि हमारा प्राचीन इतिहास कितना समृद्धशाली और गौरवशाली है और इसको संरक्षित और समझने की आवश्यकता है।
डॉ नीता दुबे ने भारत सरकार, राज्य सरकार के विभिन्न विभागों ,संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम एवं अंतरराष्ट्रीय संगठनों एवं कारपोरेट सेक्टर में उच्च पदों पर कार्य किया । डॉ नीता दुबे ने हाल में ही अलवर जिले के शैव कला का अध्ययन एवं दस्तावेजीकरण किया जिसका प्रकाशन शीघ्र होना है। वे मध्य प्रदेश के विभिन्न संग्रहालयों  की शैव प्रतिमाओं का अध्ययन एवं विषय से संबंधित नवीन खोजो का भी संकलन कर रही हैं । इस अवसर पर आर्कियोलॉजी के विद्यार्थियों के साथ-साथ इतिहास विषय के स्नातक , स्नातकोत्तर एवं शोध छात्र-छात्राएं भी उपस्थित रहे। डॉ नीता दुबे द्वारा अपने व्याख्यान में आर्कियोलॉजी का अर्थ ,डिजिटल आर्कियोलॉजी, रॉक आर्ट ,म्यूजियम आर्कियोलॉजी तथा आर्कियोलॉजी में दस्तावेजों का संकलन किस प्रकार से किया जाता है के विषय पर विस्तार से बताया। डॉ नीता दुबे ने व्याख्यान में  आर्कियोलॉजी के विभिन्न प्रकार तथा अध्ययन के आठ चरणों के भिन्न-भिन्न विषयों के साथ बताया साथ ही यह भी बताया कि आर्कियोलॉजी सर्वे आफ इंडिया द्वारा इन अध्ययनों के लिए कौन से नियम और कानून है। डॉ नीता दुबे ने बताया कि आर्कियोलॉजी के अध्ययन द्वारा सांस्कृति धरोहर ,पर्यावरण, एंथ्रोपोलॉजी, वनस्पति विज्ञान, जीव विज्ञान आदि  विषयों पर भी अध्ययन किया जा सकता है।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ बीआर पंत द्वारा डॉ नीता दुबे के व्याख्यान की प्रशंसा करते हुए इतिहास विभाग को ज्ञानवर्धक एवं रचनात्मक व्याख्यान को आयोजित करने की बधाई दी । इतिहास विभाग के विभागाध्यक्ष डॉक्टर सुरेश टम्टा ने मुख्य वक्ता, समस्त प्राध्यापक एवं समस्त प्रतिभागियों को धन्यवाद ज्ञापित किया। इस संगोष्ठी में डॉ राजेश कुमार, डॉक्टर महिपाल कोटियाल, डॉ दिनेश कुमार, डॉ देवेश गर्बयाल, डॉ नवल लोहनी, डॉ पंकज कुमार, डॉ सुधीर नैनवाल एवं स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर के छात्र छात्राएं उपस्थित रहे ।
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