ऋषिकेश में होगा 30 दिसंबर को वैश्विक आध्यात्मिक सम्मेलन, पांडवाज बैंड की रहेगी ख़ास प्रस्तुति, 31 को होगी परिचर्चा

- कार्यक्रम का उद्देश्य सनातन धर्म का प्रचार प्रसार करना और भारत पुनः विश्व गुरु बनाना : पंकज भट्ट
ऋषिकेश :(मनोज रौतेला) तीर्थनगरी में ३० दिसम्बर और ३१ दिसंबर को बड़े कार्य्रकम होने वाले हैं. रविवार को मोदी रिट्रीट में एक प्रेस वार्ता में जानकारी देते हुए कार्यक्रम संयोजक पंकज भट्ट के मुताबिक़, ऋषिकेश के दिल कहे जाने वाले त्रिवेणी घाट पर 30 दिसंबर को वैश्विक आध्यात्मिक सम्मेलन आयोजित होने जा रहा है. इसमें उत्पांतराखंड का प्रसिद्द और युवा दिलों की धड़कन कहे जाने वाले “पाण्डवाज” बंद की प्रस्तुति होगी. शाम ३ बजे से कार्यक्रम शुरू होंगे. शाम ८ बजे तक चलेंगे. अंत में पांडवाज बंद की प्रस्तुति होगी. उससे पहले मुख्य अतिथियों का स्वागत के साथ संबोधन फिर देश विदेश से आये हुए मेहमानों के द्वारा आरती परिसर में गंगा आरती फिर पांडवाज बंद की प्रस्तुति होगी. जिसमें उम्मीद जताई जा रही है स्थानीय लोगों के अलावा देश विदेश से आये हुए मेहमानों, पर्यटकों की अच्छी खासी संख्या होगी. मां गंगा किनारे त्रिवेणी घाट पर ऋषिकेश वासी इस कार्यक्रम का आनंद ले पायेंगे.

प्रेस वार्ता के दौरान, २०२५ साल के अंत दिन यानी ३१ दिसंबर के कार्यक्रम की जानकरी देते हुए पंडित लक्ष्मी नारायण जोशी ने बताया, “परिचर्चा जो होगी वह वीरभद्र रोड स्थित, मोदी योगा रिट्रीट होटल में होगी. इस परिचर्चा में ऋषिकेश व आस पास के महंत और श्री महंत रहेंगे मौजूद साथ ही कई गणमान्य ब्यक्ति रहेंगे. मुख्य विषय रहे–“सनातन संस्कृति व संवर्धन एवं ब्राह्मणों का योगदान”…इस विषय पर विशेष परिचर्चा होगी. कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर वीके मोदी रहेंगे मौजूद. यह परिचर्चा सुबह १० बजे से शुरू हो कर १२:३० बजे तक चलेगी.”
पंकज भट्ट के मुताबिक़, इस भव्य सम्मेलन में उत्तराखंड के प्रसिद्ध फोक बैंड “पांडवाज बैंड” द्वारा पांडवाज नाइट का विशेष आयोजन किया जाएगा।साथ ही युवा गायिका करिश्मा शाह एवं रुहान भारद्वाज अपनी सुमधुर प्रस्तुतियाँ देंगे।कार्यक्रम में राजा ऋषि भूपेन्द्र कुमार मोदी जिनको वीके मोदी के नाम से जाना जाता है. साथ ही भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और राज्य सभा सांसद महेन्द्र भट्ट सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहेंगे। कार्य्रकम संयोजक पंकज भट्ट रहेंगे. प्रेस वार्ता के दौरान, पंकज भट्ट, पंडित लक्ष्मी नारायण जोशी और प्रदीप नाम्बियार (केरल) रहे मौजूद.



