बागेश्वर: हुड़किया बौल….!! बिलौना में धान की रोपाई कर रही महिलाओं के साथ जिलाधिकारी अनुराधा पाल ने भी हुड़किया बौल के साथ धान की रोपाई की

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  • हुड़किया बौल के साथ धान की रोपाई उत्तराखंड की एक पुरानी परंपरा है। जनपद के कुछ स्थानों में आज भी इसका निर्वहन किया जा रहा है
  • जिलाधिकारी अनुराधा पाल ने कहा कि उत्तराखंड में लोकगीतों की समृद्ध परंपरा रही है। हुड़किया बौल इसमें प्रमुख है.कुमाऊं के लोक का अतीत अत्यंत समृद्ध रहा है.

बागेश्वर : हुड़किया बौल क्या है ? किसे कहते हैं ? आईये इसको जानते हैं. सबसे ख़ास बात है खुद डीएम ने इसमें सहभागिता की. जनपद के विभिन्न क्षेत्रों में धान रोपाई का कार्य जोर-शोर से चल रहा है। 11 जुलाई को मंगलवार को बिलौना में धान की रोपाई कर रही महिलाओं के साथ जिलाधिकारी अनुराधा पाल ने भी हुड़किया बौल के साथ धान की रोपाई की। इस दौरान जिलाधिकारी को अपने बीच पाकर महिलाएं काफी खुश नजर आयी। आपको बता दें, हुड़किया बौल के साथ धान की रोपाई उत्तराखंड की एक पुरानी परंपरा है। जनपद के कुछ स्थानों में आज भी इसका निर्वहन किया जा रहा है। धीरे धीरे अब यह परम्परा लुप्त हो रही है. इसको सहेजने ज़िंदा रखनी की जरुरत है. डीएम की इस पहल का स्वागत होना चाहिए.

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जिलाधिकारी ने कहा कि उत्तराखंड में लोकगीतों की समृद्ध परंपरा रही है। हुड़किया बौल इसमें प्रमुख है। उन्होंने कहा खेती और सामूहिक श्रम से जुड़ी यह परंपरा जीवंत रहे, इसका बीड़ा सभी को उठाना होगा। कहा कि कुमाऊं के लोक का अतीत अत्यंत समृद्ध रहा है। लोकगीतों के ही कई आयाम है। लोकगीतों को इतने सलीके से तरासा गया है, कि इनमें जीवन का सार दिखता है। अपनी पुरातन विरासत को संरक्षित करने और उसे नई पीढ़ी तक ले जाने का प्रयास सभी को करना चाहिए। जिलाधिकारी ने हुड़किया बौल के साथ धान की रोपाई को अपना पहला अनुभव बताते हुए इसे आनंदित करने वाली संस्कृति बताया। उन्होंने कहा युवाओं के साथ ही प्रवासियों को भी इस प्रकार के आयोजनों में बढ-चढ कर हिस्सा लेना चाहिए, इससे जहां एक ओर हुड़किया बौल जैसी पारंपरिक संस्कृति को बल मिलेगा, वहीं हुडका वाद्ययंत बजाने वाले कलाकारों को प्रोत्साहन मिलेगा।

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इस दौरान राजस्व उपनिरीक्षक मोहन सिंह भाकुनी, लोक गायक किशन सिंह दानू समेत भुबन चन्द्र, अनीता देवी, सुनीता देवी, पुष्पा देवी, देवकी देवी, रजनी देवी, भावना देवी, बबीता देवी आदि महिलाएं मौजूद थी।

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