देहरादून : आम आदमी पार्टी (आप) ऐसे देवभूमि में क्या पैर जमा पायेगी ?

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देहरादून : जब नयी नवेली पार्टी आती है उससे लोग जुड़ते हैं, उससे उम्मीद रखते हैं और एक योजना बनाते हैं. लेकिन देवभूमि उत्तराखंड में 70 सीटों पर चुनाव का ऐलान करने वाली आम आदमी पार्टी के कार्यकर्तों में भगदड़ सी मची हुई है. देवभूमि में पार्टी से अच्छे लोग जुड़े लेकिन उन्हीं अच्छे लोग धीरे धीरे पार्टी के नेताओं को खटकने लगे. फिर एक एक कर पार्टी छोड़ कर कर भाजपा या कांग्रेस में जाने लगे. शायद पार्टी यह समझने में देर कर गयी देवभूमि ने नीति रीति दिमाग से ज्यादा ‘दिल’ से बनती हैं फिर योजना में तब्दील होती है. दिल्ली मॉडल को सामने रख कर उत्तराखंड जैसे आपदा ग्रस्त राज्य में कैसे संभव है यह लागू हो जाए ? यह एक बहुत सरल प्रश्न है और इसका उत्तर भी सभी जानते हैं. उत्तराखंड हमेश राष्ट्रीय मुद्दों पर अपना मन बनाता है क्योँकि अपने छोटे छोटे मुद्दे राष्ट्र के नाम पर वह बलिदान करना जनता है. क्योँकि देश भक्ति दिल और दिमाग में रहती है. इसलिए छोटे से 13 जिलों के राज्य में दो आर्मी के रेजीमनेट हैं ‘गढ़वाल रायफल’ और ‘कुमाऊं रेजिमेंट. दोनों ही जहाँ तैनात कर दी तो दुश्मन 10 बार सोचता है दोनों के बारे में. ऐसे में दिली से जैसे मुद्दे यहाँ पर कहाँ से जगह पा पाएंगे ? दिल्ली में गेट से निकलते ही रिक्शा या टैक्सी कर स्कूटर में बैठना पड़ता उत्तराखंड में कई किलोमीटर चलेंगे तब आपको सड़क दिखेगी. दिल्ली मॉडल कहाँ और कैसे लागू करेंगे ? हेल्थ और शिक्षा की बात करें तो उसमें भी भौगोलिक जटिलताएं हैं. कहाँ से बजट आएगा कहाँ से कैसे लागू करेंगे. 1000 रुपये फ्री देकर महिलाओं को कितना लोभ दे पाएंगे ? एक बार घर से निकलने पर आने जाने का किराया इतना है 1000 भी कम हैं.

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ऐसे में दिल्ली वाले नेताओं को समझना चाहिए यह दिल्ली, पंजाब नहीं है बल्कि उत्तराखंड है जो प्रकर्ति (नेचर) की सुनते हैं उसकी भाषा बोलते हैं न कि पॉलिटिक्स की. हाल ही में संजय भट्ट जिन्होंने आम आदमी पार्टी छोड़ी उन्होंने कई गंभीर आरोप लगाए छोड़ने पर. उसमें राजनीतिक पंडितों की मानें तो काफी हद सचाई दिखती है. आप पार्टी के पूर्व प्रदेश प्रवक्ता व राष्ट्रीय परिषद के सदस्य रहे संजय भट्ट जिन्होंने गढ़वालियों के दमन, महिलाओं के दमन और अपराधियों को टिकट देने के आरोप लगाते हुए आप पार्टी छोड़ी थी.

भट्ट ने कहा कि आप की झाड़ू की तीलियाँ बिखर चुकी हैं, और इसका मुख्य कारण आप पार्टी का बसपा की तरह ही निरंकुश हो कर निर्णय लेना है। पैसे से सत्ता और सत्ता से पैसा के आरोपों के साथ कई आप नेता पार्टी को तिलांजली दे चुके हैं। भट्ट ने कहा कि प्रभारी मोहनिया सिर्फ झूठ बोलते हैं, जैसे 6 भाजपा मंत्री आप पार्टी जॉइन करेंगे, 12 विधायक आप पार्टी जॉइन करेंगे, 60% टिकट कार्यकर्ताओं को देंगे आदि।संजय भट्ट ने यह भी कहा कि प्रभारी दिनेश मोहनिया और सारे प्रवक्ता लोकपाल पर खामोश हैं, रोज 2-3 प्रेस कॉन्फ्रेंस करने वाली आप पार्टी ने आज तक उत्तराखण्ड में लोकपाल/लोकायुक्त पर एक भी प्रेस वार्ता नहीं की है”.

बरिष्ठ पत्रकार और राज्य आंदोलनकारी डीएस गुंसाई का कहना है “आप ने इस प्रदेश को समझने की कोशिश नहीं की. पार्टी के प्रभारी पर ऐसे गंभीर आरोप लग रहे हैं. दिल्ली वाले नेता सीधे देहरादून निकल पड़ते हैं रास्ते में हरिद्वार, ऋषिकेश, पहाड़ पड़ता है यहाँ आने में उनको ठण्ड लग जाती है. ऐसे में पार्टी में जोश कहाँ से आएगा ? कार्यकर्ता मायूश ही होगा. नेताओं की कमांड वाली लगाम दिल्ली में है वहां से हिलती है लगाम. राज्य के नेताओं पर भरोसा नहीं दिखा. ऐसे में राज्य को न समझ पाना पार्टी को इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है.”

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उत्तराखंड में आप पार्टी को छोड़ने वाले नेताओं, पदाधिकारियों की लिस्ट देखें तो इस प्रकार है कुछ-

  1. रविन्द्र जुगरान, वरिष्ठ नेता
  2. चन्द्र किशोर जखमोला, मेजर जनरल, प्रदेश उपाध्यक्ष
  3. विनोद कपरूवाण, प्रदेश उपाध्यक्ष
  4. अनन्त राम चौहान IPS, कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष
  5. सुबर्धन शाह IAS
  6. संजय भट्ट, प्रदेश प्रवक्ता
  7. राकेश काला, प्रदेश प्रवक्ता
  8. आशुतोष नेगी, प्रदेश प्रवक्ता
  9. अवतार राणा, प्रदेश प्रवक्ता
  10. जितेंद मलिक, प्रदेश सचिव
  11. अतुल जोशी, प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य
  12. संजय पोखरियाल, प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य
  13. संजय सिलसुवाल, फाउंडर
  14. रिंकू सिंह राठौर, जिलाध्यक्ष परवादून
  15. गुरमेल सिंह राठौर, जिलाध्यक्ष पछवादून
  16. संजय क्षेत्री, जिला महासचिव देहरादून
  17. दीपक सेलवान, प्रदेश उपाध्यक्ष, SC प्रकोष्ठ
  18. गौरव उनियाल, जिला मीडिया प्रभारी देहरादून
  19. सुरेश भट्ट, यमकेश्वर
  20. संदीप नेगी, संगठन मंत्री बद्रीनाथ
  21. नवीन बिष्ट, कैंट
  22. सुनीता राणा, उधमसिंह नगर
  23. संदीप गोयल, व्यपार मण्डल महासचिव
  24. राजू सिंह, महासचिव धर्मपुर
  25. पप्पू यादव, उपाध्यक्ष धर्मपुर
  26. रविन्द्र पड़ियार, नेता आप धर्मपुर
  27. राजेन्द्र प्रसाद गैरोला, निर्दलीय धर्मपुर
  28. रोहित रोहिला, प्रदेश महासचिव, आप युवा मोर्चा
  29. एडवोकेट विनोद कुमार, प्रदेश सचिव
  30. बिल्लू बाल्मीकि
  31. अजय सोनकर, (रि) उपनिदेशक आयकर
  32. अजय अग्रवाल, प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य
  33. राजेश शर्मा, प्रदेश सचिव
  34. महाबीर अमोला, ऋषिकेश
  35. डॉ भुवन चन्द्र आर्य
  36. भूपेंद्र फरासी, जिलाध्यक्ष महानगर देहरादून
  37. त्रिलोक सिंह सजवाण, पूर्व जिलाध्यक्ष व रायपुर, मसूरी प्रभारी
  38. सन्तोष कबड़वाल, जिलाध्यक्ष नैनीताल
  39. रुचि धस्माना, प्रदेश उपाध्यक्ष, महिला मोर्चा
  40. मनोज द्विवेदी, प्रदेश संयुक्त सचिव
  41. सुनील सिंघल, जिला प्रवक्ता हरिद्वार
  42. संजीव तोमर, बरिष्ठ कार्यकर्ता और इनके हजारों साथी, समर्थक व शुभचिंतक
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