UK: राजस्व ग्राम बनाने की मांग खारिज की कोर्ट ने,लाखों को झटका

उत्तराखंड में बिन्दुखत्ता को राजस्व ग्राम बनाने की मांग को हाईकोर्ट नैनीताल ने खारिज कर दिया है. इससे वहां रहने वाले लाखों लोगों को झटका लगा है. लम्बे समय से राजस्व ग्राम बनाने कीमांग कर रहे थे. यह बड़ा झटका बताया जा रहा है. चोरगलिया निवासी भुवन चंद पोखरिया की याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति सुभाश उपाध्याय और मनोज कुमार गुप्ता की खंडपीठ ने याचिका खारिज की. बिंदु खट्टा लाल कुवां इलाके में पड़ता है. लाखों की संख्या में यहाँ लोग रहते हैं. यह भूमि वन भूमि है. ऐसे ही मामले में ऋषिकेश के बापू ग्राम का मामला भी सुप्रीम कोर्ट में लंबित है. वहां भी लोग राजस्व ग्राम बनाने की मांग कर रहे हैं.
उल्लेखनीय है, लगभग एक लाख आबादी वाले इस इलाके के लिए दो-दो मुख्यमंत्री घोषणा कर चुके हैं. बिन्दुखत्ता को राजस्व गांव बनाने की. लेकिन दो दिसंबर 2025 को सरकार की ओर से सीएम की घोषणा को विलोपित कर दिया गया। उत्तराखंड में करीब पांच लाख आबादी वन व खत्तों में निवास करती है. जिसमें खटीमा, ऋषिकेश बापूग्राम और अन्य इलाके समेत कई अन्य जगह हैं. ग्रामीणों का कहन अहै, हरिद्वार जिले के पथरीभाग के अंतर्गत दो वन ग्रामों को राजस्व गांव का दर्जा दिया गया, हल्द्वानी के दमुवाढूंगा को भी राजस्व गांव बनाया गया. बिन्दुखत्ता को वनाधिकार अधिकार कानून 2006 के तहत राजस्व गांव का दर्जा दिया जाए. ऋषिकेश के बापूग्राम का मामला तो पहले से सुप्रीम कोर्ट में है. अभी उस पर फैसला आना बाकी है. इन इलाकों में लोग आज से नहीं बल्कि चार चार पीढ़ियों से रह रहे हैं. कई जगह तो उससे भी ज्यादा समय से रह रहे हैं. वहीँ सरकार को इस मामले में सामने आना चाहिए. बेशक, इनसे विकास शुल्क लेकर डीनोटिफिकेशन की प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए. कोर्ट के सामने अपना पक्ष रखने के बाद. सरकारों को सख्त रैवैया अपनाना चाहिए जहाँ पर भी अतिक्रमण होता है. या फिर इस तरह से सरकारी जमीन पर कब्जा करते हैं. नहीं तो आज रेहड़ी, पटरी लगाता है फिर कल को हटाओ तो वह दुकान, मकान की मांग करता है. यह गलत है. सरकार को अतिक्रमण के मामले में सख्त नियम कानून बनाना चाहिए. ताकि कोई अतिक्रमण न कर सके और सरकारी जमीनों पर कब्जे करने की हिम्मत न जुटा सके.




